Wikipedia

Search results

Saturday, July 23, 2022

Achhe Din

 अच्छे दिन 


सुनाता हु एक कहानी मै अपने अच्छे दिन की

विकास होगा एक दिन उस विश्वास के मातम की


जब चुनाव प्रचार हुए तब हम थे भूके नंगे

अबसे तो लगता हैं वो हि अच्छे दिन थे

जो आये थे भिकमंगे वो सत्ता मे जा बैठे

हम आपस की जाति मे आग लगाकर बैठे


जो कुछ भी हैं अपना सबकुछ बेचकर् खाओ

फिर मन की बात सुनाकर जख्मों पे मिर्च लगाओ

इस मुल्क मे जाने कैसी हो रही हैं बर्बादी

वो सोचते होंगे हमने क्या इसलिए की आजादी


परेशान हो गयी जनता चंद मुट्ठीभर चोरों से

जब अपने हि हो दुश्मन तो डर कैसा ओरों से

क्या बात हुई पुरानी के अच्छे दिन आऐंगे

उम्मीद रहेगी कबतक जब हम मर जाएंगे


ये हैं आधी कहानी बाकि बाद सुनाता हु

अपने खर्च उठाने हैं अब मै काम पे जाता हु


......देवेंद्र

No comments:

Post a Comment

Achhe Din

  अच्छे दिन  सुनाता हु एक कहानी मै अपने अच्छे दिन की विकास होगा एक दिन उस विश्वास के मातम की जब चुनाव प्रचार हुए तब हम थे भूके नंगे अबसे तो ...